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राज्यसभा चुनाव इंडिया गठबंधन में सेंध परिमल नाथवानी और बैजनाथ राम की जीत, कांग्रेस प्रत्याशी हारे

✍️ Voice Of chatra | ⏱️ 22 Jun 2026, 05:01 PM
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झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर हुए बहुप्रतीक्षित चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, इस चुनाव में सत्तारूढ़ 'इंडिया' (पूर्व यूपीए) गठबंधन को करारा झटका लगा है, क्योंकि उनके साझा कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा है। क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा खेल इस बार राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था। संख्या बल के आधार पर 'इंडिया' गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन चुनाव परिणामों ने गठबंधन के भीतर की कलह और 'क्रॉस वोटिंग' की आशंकाओं को सच साबित कर दिया। मतदान से पहले ही राजनीतिक गलियारों में विधायकों की खरीद-फरोख्त और पाला बदलने की चर्चाएं तेज थीं। नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि गठबंधन के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ। भाजपा की रणनीति रही सफल उद्योगपति परिमल नाथवानी को समर्थन देकर भाजपा और एनडीए ने एक बड़ा सियासी दांव खेला था, जो पूरी तरह से सफल रहा। चुनाव से पहले ही भाजपा नेताओं ने यह दावा किया था कि नाथवानी को उम्मीद से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त होगा। नाथवानी की जीत ने भाजपा की रणनीतिक सफलता और विधायकों के बीच उनकी पैठ को साबित कर दिया है।

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दिनांक: 22 Jun 2026

राज्यसभा चुनाव इंडिया गठबंधन में सेंध परिमल नाथवानी और बैजनाथ राम की जीत, कांग्रेस प्रत्याशी हारे

ारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर हुए बहुप्रतीक्षित चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, इस चुनाव में सत्तारूढ़ 'इंडिया' (पूर्व यूपीए) गठबंधन को करारा झटका लगा है, क्योंकि उनके साझा कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा है।

क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा खेल

इस बार राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था। संख्या बल के आधार पर 'इंडिया' गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन चुनाव परिणामों ने गठबंधन के भीतर की कलह और 'क्रॉस वोटिंग' की आशंकाओं को सच साबित कर दिया। मतदान से पहले ही राजनीतिक गलियारों में विधायकों की खरीद-फरोख्त और पाला बदलने की चर्चाएं तेज थीं। नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि गठबंधन के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ।

भाजपा की रणनीति रही सफल

उद्योगपति परिमल नाथवानी को समर्थन देकर भाजपा और एनडीए ने एक बड़ा सियासी दांव खेला था, जो पूरी तरह से सफल रहा। चुनाव से पहले ही भाजपा नेताओं ने यह दावा किया था कि नाथवानी को उम्मीद से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त होगा। नाथवानी की जीत ने भाजपा की रणनीतिक सफलता और विधायकों के बीच उनकी पैठ को साबित कर दिया है।

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