खनिज संपदा की लूट पर कब लगेगी लगाम? राजस्व चोरी और अवैध उत्खनन जारी
ईचाक क्षेत्र में राज श्री कंस्ट्रक्शन द्वारा कथित रूप से पत्थर का उत्खनन कर बिना वैध चालान के ढुलाई किए जाने और सरकार को राजस्व क्षति पहुंचाने का मामला चर्चा में है। जैसा कि आप सभी जानते है कि मनार ईचाक माईन्स का विरोध ग्रामीणों के द्वारा काफी किया गया पर पत्थर कारोबारी के आगे एक नहीं चली और कई ग्रामीणों पर FIR दर्ज किया गया । यह कोई पहला मामला नहीं है। जिले में लंबे समय से खनन गतिविधियों में अनियमितता, राजस्व चोरी और नियमों की अनदेखी के आरोप उठते रहे हैं। चतरा में खनन माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ईडी, सीबीआई या अन्य सक्षम राज्य एवं केंद्रीय जांच एजेंसियों से व्यापक जांच कराने की मांग समय-समय पर उठती रही है। जानकारों का मानना है कि विभागीय जांच के दौरान जिन मामलों में करोड़ों रुपये की राजस्व चोरी पकड़ी गई, यदि सभी खनन पट्टों, क्रशरों और परिवहन गतिविधियों की निष्पक्ष एवं गहन जांच हो तो राजस्व क्षति का आंकड़ा कई गुना अधिक सामने आ सकता है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2017 से लेकर 2023 तक वन विभाग के द्वारा कई बार खनन सहित अन्य विभाग को पत्र लिखकर दर्जनों क्रशरों और खदानों के संबंध में कम दूरी पर लीज आवंटन एवं अन्य नियमों के उल्लंघन की जानकारी दी गई ताकि दोषियों के विरुद्ध ठोस करवाई किया जाय पर गलत लीज देने और लेने वालों के विरुद्ध करवाई के बजाय सिर्फ पत्राचार का खेल जारी रहा और आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किया गया ऐसे में संबंधित विभागों पर कई सारे सवाल खड़ा होना लाजमी है । इधर टंडवा क्षेत्र में भी इरकॉन, राजा कंस्ट्रक्शन समेत कई बड़ी कंपनियों द्वारा वर्षों तक खनिज संपदाओं के व्यापक दोहन का मामला सामने आया । लगातार मामला सुर्खियों में आने के बाद भारी मात्रा में खनिज संसाधनों का दोहन किये जाने का मामला प्रकाश में आने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई सामने आई। जिले में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि कुछ प्रभावशाली कंपनियों के लाइजनर और बिचौलियों के जरिए पूरे तंत्र को मैनेज कर राजस्व चोरी और अवैध खनन के खेल को संरक्षण दिया जाता रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है, लेकिन लगातार उठ रहे सवाल यह संकेत देते हैं कि खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चतरा की खनिज संपदा से होने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन है? और वर्षों से उठ रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?